ये मेरा ही भूल .....
आज
की जिंदगी भाग दौड़ भरा
अभी
किसीके पास समय काहाँ
हरकी
ब्यस्त अपनी काम में की
हरकोई
जिरहा है जन्त्रबत जिंदगी
पता
नहीं खुदको कियूं चलताये धार II
कर्म
तत्परता है नहीं कोई बुरा
मगर
जीबनको काममयही बनाना
कर्म
करते करते ही मरजाना
बिलकुल
गलत और शदृश धुरा II
कामकी
एक योजनाबद्ध जिंदगी
देता
इंशानको यंत्र्बत सुयरा
जहां
व खोबैठता अपना अस्थित्व
केबल
रहजाता अपना जाजरा II
अपनाही
कर्म में खुद मरा
इससे
भागना भी है नहीं चारा
ये
अपनिआप बनता जिबन धारा
मेहेसुस
करता इंसान अपनीको हारा II
तुटजाता
व बनजाता निराश
केवल
अबसेस रहजाता पस्त्चाताप
तब
अता एसा एक भावधारा
कियूं
मैं चुनलिया ये गलत डगरा II

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